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रक्तदान महादान’ का बना महापर्व: शिवाय हॉस्पिटल में सैकड़ों लोगों ने दिया जिंदगी का उपहार

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कोरबा में मानवता का महापर्व: राष्ट्रीय रक्तदाता दिवस पर शिवाय हॉस्पिटल में उमड़ा जनसैलाब, सैकड़ों लोगों ने किया रक्तदान

कोरबा की नसों में दौड़ी इंसानियत: राष्ट्रीय रक्तदाता दिवस पर शिवाय हॉस्पिटल में सैकड़ों लोगों ने किया रक्तदान

कोरबा। राष्ट्रीय रक्तदाता दिवस के पावन अवसर पर ट्रांसपोर्ट नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में रविवार को आयोजित मेगा ब्लड डोनेशन कैंप मानवता के महापर्व में बदल गया। सुबह से ही अस्पताल परिसर में रक्तदाताओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा और सैकड़ों नागरिकों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर जरूरतमंदों को नया जीवन देने का संकल्प लिया।

इस विशाल रक्तदान शिविर में सिख समाज, सिंधी समाज, हिंदू क्रांति सेना सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। युवाओं, महिलाओं और समाजसेवियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। हर आयु वर्ग के लोग इस पुनीत कार्य से जुड़कर मानव सेवा की मिसाल पेश करते नजर आए। 

रक्तदान करना स्वयं के स्वास्थ्य के लिए भी हैं लाभकारी – शिवाय हॉस्पिटल

शिवाय हॉस्पिटल के चिकित्सकों एवं प्रबंधन ने बताया कि “रक्तदान केवल किसी जरूरतमंद की जान बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि यह स्वयं के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। एक यूनिट रक्त किसी परिवार की अंतिम उम्मीद बन सकती है।” उन्होंने लोगों से नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील भी की। रक्तदाताओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रबंधन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में सभी आवश्यक स्वास्थ्य मानकों का पालन करते हुए रक्त संग्रह किया गया। रक्तदान से पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण तथा रक्तदान के बाद आवश्यक परामर्श और अल्पाहार की भी व्यवस्था की गई, साथ ही उन्हें उपहार भी दिया गया। शिविर में रक्तदान करने पहुंचे युवाओं ने इसे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी बताया। महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए यह संदेश दिया कि मानवता की सेवा के लिए हर व्यक्ति आगे आ सकता है। कई रक्तदाताओं ने पहली बार रक्तदान कर दूसरों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रीय रक्तदाता दिवस पर आयोजित यह मेगा कैंप न केवल रक्त की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ, बल्कि समाज में सेवा, संवेदना और सामाजिक एकता का प्रेरणादायी संदेश भी दे गया। “रक्तदान महादान है” की भावना को चरितार्थ करते हुए कोरबा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जरूरत की घड़ी में यह शहर मानवता के लिए हमेशा सबसे आगे खड़ा रहता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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