न्याय के देवता शनिदेव की शरण में नवग्रहों का आशीर्वाद — उज्जैन का प्रसिद्ध नवग्रह शनि मंदिर बना आस्था का दिव्य केंद्र
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त्रिवेणी संगम पर विराजित हैं नवग्रह देव, शनिवार और शनैश्चरी अमावस्या पर उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन केवल भगवान महाकालेश्वर की भक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि नवग्रह उपासना के प्रमुख केंद्र के रूप में भी देशभर में अपनी विशेष पहचान रखती है। शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी संगम के पावन तट पर नवग्रह शनि मंदिर श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक विश्वास का महत्वपूर्ण केंद्र है।
शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर स्थित यह मंदिर नौ ग्रहों को समर्पित है। यहां शनि देव के साथ नवग्रहों की पूजा-अर्चना की जाती है। शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान के बाद शनि मंदिर और नवग्रहों के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।

शनिदेव को माना जाता है न्याय का देवता
सनातन परंपरा में भगवान शनिदेव को कर्म और न्याय का देवता माना जाता है। भक्तजन श्रद्धा के साथ शनि देव का पूजन कर अपने जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता की कामना करते हैं। नवग्रहों की एक साथ आराधना इस मंदिर की धार्मिक विशेषता को और बढ़ाती है।

त्रिवेणी तट पर आध्यात्मिक वातावरण
शिप्रा के पावन तट पर स्थित मंदिर का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति कराता है। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है और विशेष पर्वों एवं शनैश्चरी अमावस्या के अवसर पर यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महाकाल दर्शन के साथ नवग्रह शनि मंदिर के दर्शन भी आस्था की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बनते जा रहे हैं। न्याय के देवता शनि और नवग्रहों के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

आस्था का संदेश स्पष्ट है—कर्म पवित्र हो, मन में विश्वास हो और जीवन में सत्य का मार्ग हो, तो ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है।
ॐ शं शनैश्चराय नमः। 🙏











