धर्म और आस्था

नाग पंचमी की पौराणिक कथा: जब भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का किया दमन

✍️ तेजस्वी न्यूज - सबसे तेज

कालिया नाग के फनों पर श्रीकृष्ण का तांडव! यमुना को विष से कराया मुक्त, नाग पंचमी की कथा में छिपा बड़ा संदेश

नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो नाग देवताओं की पूजा और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का संदेश देता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान शिव, नाग देवता और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी पौराणिक कथाओं के कारण विशेष महत्व रखता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल में वृंदावन के समीप यमुना नदी में कालिया नाग का वास था। उसके विष के कारण यमुना का जल दूषित हो गया था और आसपास के जीव-जंतुओं तथा ग्रामीणों का जीवन संकट में पड़ गया था। एक दिन बालक श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ खेलते हुए यमुना तट पर पहुंचे। गेंद नदी में गिर जाने पर श्रीकृष्ण उसे निकालने के लिए यमुना में कूद गए।

श्रीकृष्ण और कालिया नाग के बीच भयंकर संघर्ष हुआ। अंततः श्रीकृष्ण ने कालिया नाग के फनों पर नृत्य कर उसके अहंकार और विष का दमन किया। कालिया नाग की पत्नियों ने श्रीकृष्ण से प्रार्थना की, जिसके बाद भगवान ने उसे यमुना छोड़कर समुद्र में जाने का आदेश दिया। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने यमुना को विषैले प्रभाव से मुक्त किया और ब्रजवासियों को भय से मुक्ति दिलाई।

नाग पंचमी से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार, नाग देवताओं की पूजा करने से परिवार की सुख-समृद्धि और रक्षा होती है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग यह संदेश देते हैं कि सृष्टि के प्रत्येक जीव का अपना महत्व है और मनुष्य को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रखना चाहिए।

इस पर्व पर श्रद्धालु नाग देवता की पूजा करते हैं, दूध, पुष्प और अक्षत अर्पित करते हैं तथा परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। नाग पंचमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व भी है।

नाग पंचमी हमें अहंकार पर विनम्रता, बुराई पर अच्छाई और भय पर विश्वास की विजय का संदेश देती है। यही कारण है कि सावन की पवित्र बेला में मनाया जाने वाला यह पर्व भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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