अरपा-भैंसाझार नहर परियोजना में भ्रष्टाचार, तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप तिवारी निलंबित
अर्जुन गुप्ता, पत्रकार व वरिष्ठ आर.टी.आई कार्यकर्ता


रायपुर/बिलासपुर। बिलासपुर जिले में बहुचर्चित अरपा-भैंसाझार- चकरभाठा में भू-अर्जन में किये गये अनियमितता पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। कोटा के तत्कालीन एसडीएम रहे और वर्तमान में वरिष्ठ क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी आनंदरूप को सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। गौरतलब है कि बिलासपुर जिला में अरपा भैंसाझार परियोजना में एक ही खसरे का अलग-अलग रकबा दिखाकर मुआवजा बांटने में 3 करोड़ 42 लाख 17 हजार 920 रुपये की अनियमितता सामने आयी थी। पहले जांच में कोटा के तत्कालीन एसडीएम आनंद रूप तिवारी, कीर्तिमान सिंह राठौर समेत अन्य अफसरों को दोषी पाया गया था।

इस जांच रिपोर्ट में एसडीएम आनंदरूप का नाम सामने आने के बाद भी उन्हे बिलासपुर आरटीओं की जवाबदारी दे दी गयी थी। इस पूरे मामले में सरकार ने अब एक्शन लेते हुए तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप को सस्पेंड कर दिया है। आदेश में सरकार ने स्पष्ट किया है कि अरपा-भैंसाझार-चकरभाठा में भू-अर्जन में नहर निर्माण के लिए किये गये भू अर्जन में अनियमितता के कारण सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ है। इस गंभीर आर्थिक अनियमितता में लिप्त अफसर आनंदरूप को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है।

आनंदरूप तिवारी उस समय कोटा, जिला बिलासपुर में अनुविभागीय अधिकारी (रा.) एवं भू-अर्जन अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। उनके कार्यकाल मे भू-अर्जन की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिससे शासन को आर्थिक क्षति हुई है। राज्य शासन ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के उल्लंघन के रूप में लेते हुए इसे कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही और उदासीनता माना है।

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1)(क) के अंतर्गत आनंदरूप तिवारी को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, बिलासपुर संभाग में निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।





