विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस पर अंतराष्ट्रीय “अटल माइंड टॉक” का भव्य ऑनलाइन कॉन्क्लेव आयोजित
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विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर अटल बिहारी वाजपेई ट्रस्ट (भाव फाउंडेशन) बिलासपुर छत्तीसगढ़ द्वारा “अटल माइंड टॉक” के अंतर्गत एक ऑनलाइन कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के मनोवैज्ञानिकों, शिक्षकों, विशेषज्ञों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने सहभागिता कर ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में थेनी (तमिलनाडु) से काउंसलर अर्चना ईश्वरदासन, हैदराबाद से कोच एवं ट्रेनर स्वाति त्रिपाठी, चंडीगढ़ से मनोवैज्ञानिक प्रभलीन कौर, नई दिल्ली से कैप्टन दिनीशा भारद्वाज, कोलकाता से क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. मेघा राठी, फरीदाबाद (हरियाणा) से क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. आशिता माथुर, अजमेर (राजस्थान) से मनोवैज्ञानिक रेशम भाटिया एवं गुरुग्राम से क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. तनुजा कौशल ने अपने विचार साझा किए।
इसी क्रम में चेन्नई (तमिलनाडु) से लेखिका, स्टूडेंट काउंसलर एवं काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. अन्नमा रेड्डी चामुंडेश्वरी, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से योगा थेरेपिस्ट शेफाली बेरी, नोएडा से प्रिंसिपल सिमरन शर्मा तथा कोलकाता से पीएचडी स्कॉलर, कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, एक्सप्रेसिव आर्ट थेरेपिस्ट, किंक एवं क्वीयर अफर्मेटिव थेरेपिस्ट एवं सेक्स थेरेपिस्ट श्रद्धांजलि दासगुप्ता (चक्रवर्ती) ने भी ऑटिज़्म से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) से क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. पेनू कुमारी, कोलकाता से एसोसिएट प्रोफेसर (पॉलिटिकल साइंस विभाग) एवं एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. तुलिका चक्रवर्ती, मुंबई से सर्टिफाइड काउंसलर एवं स्पेशल एजुकेटर सिमरन चोपड़ा, मलेशिया से डॉ. शांति रामैया, कच्छ (गुजरात) से गौरी ठक्कर एवं वलसाड (गुजरात) से डॉ. कृति उपाध्याय ने भी सहभागिता की।
इसके अलावा अहमदाबाद (गुजरात) से स्पेशल एजुकेटर एवं विशेष रूप से सक्षम बालक की माता शिखा भार्गव, दिल्ली से क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की अंतिम वर्ष की एमएससी क्लिनिकल साइकोलॉजी छात्रा वेदिका कपूर, कोलकाता से मनोवैज्ञानिक शाल्मली चटर्जी, हैदराबाद से डीएसटी सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद की वैज्ञानिक डॉ. पूनम सिंघल, दिल्ली हाई कोर्ट की अधिवक्ता सुनीता शर्मा, हिमाचल प्रदेश के राजगढ़ से मनोवैज्ञानिक पूजा साहनी एवं दिल्ली एनसीआर से क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी की अंतिम वर्ष की एमएससी क्लिनिकल साइकोलॉजी छात्रा साक्षी खत्री ने भी अपने विचार रखे।
मुंबई (ठाणे) से पीडियाट्रिक ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. सपना मिश्रा, नई दिल्ली से बीएएमएस एवं काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. अंजना तोमर, फरीदाबाद से शिक्षिका प्रियंका भाट, हैदराबाद से एमडी साइकियाट्री (एम्स) सीनियर रेजिडेंट डॉ. जाह्नवी शर्मा, नई दिल्ली से क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट नेहा रघुवंशी एवं अजमेर (राजस्थान) से चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं ऑटिस्टिक मेंटर अंकिता सेठी ने भी ऑटिज़्म जागरूकता के महत्व पर बल दिया।
देहरादून से मेघना साहनी, बेंगलुरु से पीएटी एनजीओ की संस्थापक रवीथा प्रभाकरन एवं सर्टिफाइड क्लिनिकल एवं करियर काउंसलर एवं पेरेंटिंग कोच डॉ. अभाषाही कुमार ने भी अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं ने ऑटिज़्म को समझने, स्वीकार करने तथा ऐसे व्यक्तियों को उचित समर्थन एवं अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह ऑनलाइन कॉन्क्लेव समाज में जागरूकता बढ़ाने एवं समावेशी सोच विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।





