कोरबास्वास्थ्य

शिवाय हॉस्पिटल ने बचाई नन्ही जान, 600 ग्राम के कमजोर शिशु को दी गई जिंदगी, 90 दिन बाद लौटी परिवार की खुशी

✍️ तेजस्वी न्यूज - सबसे तेज

जन्म के समय महज 600 ग्राम वजन, 90 दिन एनआईसीयू में चला जिंदगी का संघर्ष; अब 2 किलो 70 ग्राम का होकर घर जाने को तैयार

कोरबा। उम्मीद कितनी भी छोटी क्यों न हो, अगर उसे संभालने वाले हाथ मजबूत हों तो जिंदगी मुश्किल से मुश्किल जंग भी लड़ सकती है। कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में जन्मे महज 600 ग्राम वजन के नन्हे शिशु ने करीब 90 दिनों तक जिंदगी की कठिन परीक्षा का सामना किया और अब 2 किलो 70 ग्राम वजन के साथ डिस्चार्ज होने की स्थिति में पहुंच गया है।

सर्वमंगला नगर निवासी विजय समर्थ और उनकी पत्नी करीब चार वर्षों से अपने घर में बच्चे की किलकारी का इंतजार कर रहे थे। चार साल बाद जब खुशियों ने दस्तक दी, तो उसके साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आ गई।

25 सप्ताह में हुआ जन्म, वजन सिर्फ 600 ग्राम

15 जून 2026 की रात करीब 1 बजे गर्भवती महिला को आपात स्थिति में शिवाय हॉस्पिटल लाया गया। गर्भकाल महज 25 सप्ताह था। स्थिति को देखते हुए अस्पताल की टीम ने तत्काल जांच और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की। चिकित्सकों की देखरेख में करीब 2:20 बजे प्रसव हुआ, लेकिन नवजात का वजन महज 600 ग्राम था।

इतने कम वजन और बेहद कम गर्भकाल में जन्मे शिशु को तत्काल एनआईसीयू में भर्ती किया गया। इसके बाद शुरू हुआ करीब 90 दिनों का वह संघर्ष, जिसमें हर दिन बच्चे की सांस और स्वास्थ्य को लेकर परिवार की उम्मीदें जुड़ी रहीं।

90 दिन एनआईसीयू में… हर दिन उम्मीद और इंतजार

600 ग्राम के इस अति-प्रीमैच्योर नवजात को करीब तीन महीने तक विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी में रखा गया। इस दौरान उसे विशेष नवजात देखभाल, श्वसन सहायता, नियंत्रित तापमान और लगातार मॉनिटरिंग की आवश्यकता रही।

पिडियाट्रिक्स विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र बागरी सहित एनआईसीयू टीम ने बच्चे की लगातार निगरानी की। परिवार के लिए हर दिन एक ही सवाल रहता था—आज बच्चा कैसा है?

बच्चे की हालत में धीरे-धीरे सुधार आने लगा और वजन भी बढ़ता गया। 600 ग्राम से शुरू हुआ सफर अब 2.070 किलोग्राम तक पहुंच चुका है।

डर से उम्मीद तक… पिता की आंखों में बदली तस्वीर

बच्चे के पिता विजय समर्थ उस कठिन दौर को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि पहली बार जब उन्होंने अपने बच्चे को देखा, तो वह बेहद छोटा और नाजुक था। परिवार के लिए वह समय बेहद कठिन था।

विजय समर्थ के अनुसार, शिवाय हॉस्पिटल के चिकित्सकों और नर्सिंग टीम ने इलाज के साथ-साथ परिवार को लगातार हिम्मत दी। करीब तीन महीने तक बच्चे की देखभाल और निगरानी ने परिवार को उम्मीद बनाए रखने की ताकत दी।

आज वही बच्चा पहले से कहीं अधिक मजबूत है। चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद परिवार के लिए यह सिर्फ बच्चे के स्वस्थ होने की खबर नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी खुशी की वापसी है।

600 ग्राम से 2 किलो 70 ग्राम तक पहुंचा वजन

15 जून को जन्म के समय महज 600 ग्राम वजन वाले इस बच्चे का वजन 19 सितंबर 2026 तक बढ़कर 2 किलो 70 ग्राम हो गया।

परिवार के लिए यह महज वजन का आंकड़ा नहीं है, बल्कि 90 दिनों की चिंता, इंतजार, दुआ और उम्मीद की कहानी है।

शिवाय हॉस्पिटल के डॉ. नागेंद्र बागरी के अनुसार बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और अब उसे डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी की जा रही है।

शिवाय हॉस्पिटल की टीम ने संभाली नन्ही सांसों की जंग

600 ग्राम जैसे बेहद कम वजन वाले नवजात की देखभाल बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में लगातार निगरानी, विशेषज्ञ चिकित्सा और अत्यंत सावधानी की आवश्यकता होती है।

इस पूरे उपचार के दौरान डॉ. नागेंद्र बागरी (पिडियाट्रिक्स), डॉ. बरखा (ड्यूटी डॉक्टर) सहित एनआईसीयू टीम की निरंतर चिकित्सा निगरानी महत्वपूर्ण रही। टीम ने उपचार के साथ-साथ परिवार को भरोसा और हिम्मत भी दी।

आरएमओ डॉ. प्रवीण और डॉ. बरखा ने भी संभाली कमान

नवजात की निरंतर देखरेख में आरएमओ डॉ. प्रवीण और डॉ. बरखा की भी अहम भूमिका रही। दोनों चिकित्सक लगातार बच्चे की स्थिति पर नजर बनाए रहे।

डॉ. प्रवीण ने कहा कि हमारा उद्देश्य मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना और उसे नया जीवन देने का हरसंभव प्रयास करना है।

600 ग्राम से शुरू हुई जिंदगी की यह जंग अब 2 किलो 70 ग्राम की उम्मीद में बदल चुकी है। परिवार के लिए यह पल राहत, खुशी और लंबे इंतजार के बाद मिली सबसे बड़ी सौगात है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Related Articles

Back to top button