कनकेश्वर धाम में उमड़ा आस्था और भक्ति का जन सैलाब, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भोले बाबा को चढ़ाया जल, कांवरिया संघ कोरबा ने किया विशाल भंडारे का आयोजन
अर्जुन गुप्ता, पत्रकार व वरिष्ठ आर.टी.आई कार्यकर्ता

कनकेश्वर महादेव को लगाया गया महाप्रसाद का भोग, कांवरिया संघ कोरबा द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन कर शिव भक्तो को किया प्रसाद का वितरण।

तेजस्वी न्यूज – सबसे तेज
कोरबा। जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर कनकी का कनकेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थान है, गांव का नाम कनकी भी कनकेश्वर महादेव मंदिर नाम पर पड़ा है, आज सावन के प्रथम सोमवार को यहां बड़ी संख्या में भक्त कांवर लेकर भोले बाबा को जल चढ़ाने और उनके दर्शन करने पहुंचे। यहां विगत 32 वर्षो से सावन के प्रत्येक सोमवार को कोरबा कांवरिया संघ द्वारा भंडारा कराया जा रहा हैं, इस वर्ष भी विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, साथ ही कनकेश्वर महादेव को महाप्रसाद का भोग लगाया गया।

प्रकृति का अद्भुत संगम है शिव शक्ति का दिव्य तीर्थ स्थल…
जिले में हसदेव नदी की कलकल बहती लहरों के किनारे, हरे-भरे जंगलों की गोद में बसे ग्राम कनकी का यह पावन स्थल, कनकी धाम, केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम है। कोरबा जिला मुख्यालय से महज 20 किमी दूर स्थित यह स्थल हर श्रद्धालु के लिए एक ऐसा ठिकाना है, जहाँ पहुंचकर ऐसा लगता हैं की आत्मा परमात्मा से जुड़ रही है।

इतिहास की परतों में छुपा दिव्यता का स्वरूप
कनकी धाम का इतिहास लगभग 1857 ई. का है। माना जाता है कि कोरबा के तत्कालीन जमींदारों ने इस पवित्र धाम का निर्माण कराया था। सदियों से यह स्थान स्थानीय लोगों की भक्ति और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। हर पत्थर, हर दीवार यहाँ की पुरातनता की गवाही देती है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे यहाँ शिव स्वयं वास करते हों और माँ दुर्गा अपनी ममता की छाया बिखेर रही हों।

वास्तुकला की अनुपम भव्यता
कनकी धाम का निर्माण पत्थरों से किया गया है, जिन पर की गई बारीक नक्काशी आज भी कला प्रेमियों और श्रद्धालुओं को समान रूप से मंत्रमुग्ध कर देती है। मंदिर के भीतर विराजित कंकईश्वर महादेव (चक्रेश्वर) और माँ दुर्गा की प्राचीन प्रतिमाएँ हर आगंतुक को एक अलौकिक शांति और श्रद्धा से भर देती हैं। यहाँ शिव–पार्वती की युगल मूर्तियाँ और नंदी महाराज की दिव्य उपस्थिति श्रद्धालुओं को ऐसा आशीर्वाद देती हैं कि मन भीतर तक प्रफुल्लित हो उठता है।

प्रकृति की गोद में बसे पवित्र कण-कण
कनकी धाम केवल आस्था का केंद्र नहीं, यह एक ऐसा स्थान है जहाँ प्रकृति स्वयं ध्यानमग्न प्रतीत होती है। मंदिर चारों ओर से घने जंगलों और शांत तालाबों से घिरा हुआ है। वसंत ऋतु में यहाँ प्रवासी पक्षियों का मधुर स्वर वातावरण को और भी दिव्य बना देता है। यहाँ का हर कोना, हर रास्ता मानो शिव का नाम जपता हो। हरे-भरे वृक्षों की छांव में बैठकर हर कोई अपने भीतर की शांति को महसूस करता है।

त्यौहारों पर अद्भुत उत्सव की झलक
पूरे सावन मास, महाशिवरात्रि, नवरात्रि और बैसाखी के अवसर पर कनकी धाम भक्ति की तरंगों से गूंज उठता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ एकत्र होकर भजन, कीर्तन और महाआरती में भाग लेते हैं। दीपों की जगमगाहट और घंटे–शंख की गूंज ऐसा प्रतीत कराती है जैसे स्वयं कैलाश की दिव्यता यहाँ उतर आई हो।
कनकी धाम, कोरबा बस स्टैंड से पहुंचने के लिए टैक्सी, ऑटो और निजी वाहन आसानी से उपलब्ध हैं। रास्ते में आने वाले हरियाली से भरे दृश्य यात्रा को एक आध्यात्मिक अनुभव में बदल देते हैं।

कनकी धाम के विशेष आकर्षण
कंकईश्वर महादेव (चक्रेश्वर) और माँ दुर्गा का प्राचीन मंदिर
पत्थर की अद्भुत नक्काशी और ऐतिहासिक शिल्पकला
हरे-भरे जंगल और तालाब का प्राकृतिक सौंदर्य
पक्षी-प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान स्थान
त्योहारों पर सजीव लोक-सांस्कृतिक माहौल

कनकी धाम वह स्थान है जहाँ श्रद्धा और शांति एक साथ निवास करते हैं। यह पवित्र धाम न केवल कोरबा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। यहाँ का वातावरण हर भक्त को यह अहसास कराता है कि सच्ची शांति मंदिर की दीवारों के भीतर नहीं, बल्कि उसकी दिव्यता को महसूस करने वाले हृदयों में बसती है।





