आपातकाल की 50 वीं बरसी पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शिवरतन शर्मा व जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने प्रेस वार्ता कर बताया की इंदिरा ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका लोकतंत्र के तीनो स्तंभो को बंधक बना कर सत्ता के आंगे उन्हे घुटने टेकने को मजबूर कर दिया था
अर्जुन गुप्ता, पत्रकार व वरिष्ठ आर.टी.आई कार्यकर्ता

इंदिरा गांधी के आपातकाल लगाये जाने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकार और प्रेस की आज़ादी सभी पर एकसाथ हमला हुआ, एमआईएसए जैसे काले कानून के तहत एक लाख से अधिक लोगों को बिना मुकदमे के जेलों में ठूंसा गया। जिनमें जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे राष्ट्रपुरुष शामिल थे।

कोरबा। प्रेस क्लब तिलक भवन में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शिवरतन शर्मा जी व जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी जी ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 25 जून 1975 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सिर्फ आपातकाल नहीं लागू किया था, बल्कि पूरे संविधान और लोकतंत्र को रौंदने का काम किया था। यह कोई युद्धकालीन आवश्यकता नहीं, बल्कि उनकी कुर्सी बचाने की बौखलाहट थी। 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी को निर्वाचित चुनाव में दोषी ठहराते हुए अयोग्य करार दिया, जिससे घबराकर उन्होंने 25 जून को देश पर आपातकाल लोगो पर थोप दिया। यह फैसला ना तो देशहित में था और ना ही किसी आपदा की मांग थी। यह एक डरी हुई प्रधानमंत्री द्वारा लोकतंत्र की नींव को हिलाने का षड्यंत्र था।
पत्रकारो की गिरफ्तारी हुई, न्यायलय के अधिकार को समाप्त कर दिया गया
25 जून 2025 को केबिनेट की मंजूरी के बगैर इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया, और आपातकाल लगाने के बाद जितने कांग्रेस विरोधी नेता थे और कांग्रेस के अंदर इंदिरा गांधी के विरोधी नेता थे उनकी गिरफ्तारी हो गई। रातोरात प्रिंट मीडिया के कनेक्शन डिस्कनेक्ट किये गये, उनकी प्रतिया नही छपी, उन पत्रकारो की गिरफ्तारी हुई, और पूरे देश में 21 महीने आपातकाल लगा था, और 21 महीने आपातकाल के दौरान जिसने भी कांग्रेस या इंदिरा का विरोध किया उन्हे गिरफ्तार करवा दिया गया। संविधान के प्रस्तावना को बदल दिया गया, जबकी संविधान के प्रस्तावना को बदलने का अधिकार किसी को भी नही हैं, न्यायलय के अधिकार को समाप्त कर के राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को उससे उपर बना दिया गया। अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग कर के आपातकाल लगाया गया था, पूरे देश में तानाशाही हावी हो चुकी थी, सरकार के निर्णय का विरोध करना मतलब अपने जीवन को अपनी स्वतंत्रता को संकट में डालना ही हो गया था। कार्यपालिका विधायिका और न्यायपालिका लोकतंत्र के तीनो स्तंभो को बंधक बना कर सत्ता के आंगे उन्हे घुटने टेकने को मजबूर किया गया था।
एक लाख से अधिक लोगों को बिना मुकदमे के जेलों में ठूंसा गया
वही संविधान की आत्मा को रौंदा गया और न्यायपालिका की स्वतंत्रता छीनी गई। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी ने 39 वें और 42 वें संविधान संशोधनों के माध्यम से संविधान की मूल आत्मा पर आघात किया। प्रधानमंत्री और शीर्ष पदों को न्यायिक समीक्षा से बाहर कर देना तानाशाही मानसिकता का परिचायक था।न्यायपालिका की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकार और प्रेस की आज़ादी सभी पर एकसाथ हमला हुआ। वही श्री शर्मा ने कहा कि जो लोग आज संविधान बचाओ का नारा दे रहे हैं, वही इतिहास में संविधान को सबसे ज़्यादा रौंदने वाले हैं। आपातकाल के दौरान संजय गांधी जैसे गैर-संवैधानिक व्यक्ति नीतियां बनाने लगे। वही एमआईएसए जैसे काले कानून के तहत एक लाख से अधिक लोगों को बिना मुकदमे के जेलों में ठूंसा गया। जिनमें जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे राष्ट्रपुरुष शामिल थे।
सत्ता बचाने के लिए आपातकाल लागू किया गया था
शिवरतन शर्मा ने कहा कि 1978 में शाह आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख था कि आपातकाल थोपने का कोई संवैधानिक आधार नहीं था। इसे सिर्फ सत्ता बचाने के लिए लागू किया गया था। लेकिन 1980 में सत्ता में लौटते ही पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने उस रिपोर्ट को ही नष्ट करवा दिया। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया तक को भंग कर दिया ताकि सेंसरशिप की सच्चाई उजागर न हो सके।
कांग्रेस की आज की राजनीति भी उसी तानाशाही सोच पर आधारित हैं
भाजपा प्रवक्ता ने वर्तमान कांग्रेस पार्टी को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की आज की राजनीति भी उसी तानाशाही सोच पर आधारित है। आज सत्ता में न रहने पर कांग्रेस लोकतंत्र पर खतरे की बात करती है, लेकिन जब सत्ता में होती है तो प्रेस, न्यायपालिका और संस्थागत स्वतंत्रता को कुचलने से पीछे नहीं हटती। राहुल गांधी जो गरीबों की बात करते हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि उनकी दादी ने तुर्कमान गेट पर उन्हीं गरीबों पर गोलियां चलवाई थीं।
आज होगा लोकतंत्र संगोष्ठी और प्रदर्शनी का आयोजन
प्रेसवार्ता में जानकारी दी गई कि आपातकाल की 50 वीं बरसी (25 जून 2025) को कोरबा में एक विशेष लोकतंत्र संगोष्ठी और प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आपातकाल के काले पक्ष जैसे प्रेस सेंसरशिप, मानवाधिकार हनन, राजनीतिक दमन और संस्थागत नियंत्रण को प्रदर्शित किया जाएगा। इस दिन को लोकतंत्र के पुनर्स्मरण और जनजागरण के रूप में मनाया जाएगा। वही प्रेसवार्ता के दौरान मंच पर कई प्रमुख जनप्रतिनिधि व भाजपा पदाधिकारी उपस्थित रहे। जिनमें भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, नगर निगम महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर, पूर्व महापौर श्री जोगेश लांबा, पार्षद नरेंद्र देवांगन, वरिष्ठ भाजपा नेता ज्योति नंद दुबे, एमआईरी मेंबर हितानंद अग्रवाल, कोसाबाड़ी मंडल अध्यक्ष राजेश राठौर, कोरबा मंडल अध्यक्ष योगेश मिश्रा, श्रीमती ज्योति वर्मा, लक्की नंदा, अजय चन्द्रा, सूरज पांडेय, प्रदीप सिंह, सह मीडिया प्रभारी पवन सिन्हा, अर्जुन गुप्ता, उदय, राकेश नागरमल अग्रवाल, रामकुमार त्रिपाठी व अन्य उपस्थित रहे।





